रायपुर.
सावन माह में पूरा छत्तीसगढ़ शिवमय हो चुका है. शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. दूर-दूर से भक्तों और कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला जारी है.
आज सावन महीने का दूसरा सोमवार है, जिसका हिंदू धर्म के लोगों में विशेष महत्व होता है. इस कारण बड़ी संख्या में लोग आज सुबह से मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं.
रायपुर के शिव मंदिरों में भक्तों का तांता
सावन के दूसरे सोमवार पर रायपुर के शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है. भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं. हर-हर महादेव के जयकारों से शिव मंदिर गूंज रहे हैं. श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामना मांग रहे हैं. आज सावन के दूसरे सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का भी दुर्लभ संयोग बना है। करीब 6 साल बाद सावन सोमवार और प्रदोष व्रत एक साथ पड़ रहे हैं.
फिंगेश्वर के फणीकेश्वर नाथ मंदिर में आस्था का सैलाब-
सावन के दूसरे सोमवार पर गरियाबंद के फिंगेश्वर स्थित फणीकेश्वर नाथ महादेव मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। सुबह से लोग जलाभिषेक करने और आशीर्वाद लेने के लिए पहुंच रहे हैं. मंदिर में बम भोले के नारे गूंज रहे हैं. पूरा माहौल शिवमय हो चुका है.
ये हैं छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध शिव मंदिर –
- कुलेश्वर मंदिर — राजिम, रायपुर (9वीं शताब्दी)
- भोरमदेव मंदिर — कबीरधाम (एक हजार वर्ष पुराना)
- लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर — शिवरीनारायण, जांजगीर-चांपा (6 वीं शताब्दी)
- भूतेश्वर महादेव मंदिर — मरोदा, गरियाबंद
- सुरंग टीला मंदिर — सिरपुर, महासमुंद (7 वी शाताब्दी)
- पातालेश्वर/केदारेश्वर महादेव — मल्हार, बिलासपुर (13वीं–14वीं शताब्दी)
- देवबलोदा का प्राचीन शिव मंदिर — तहसील पाटन, दुर्ग (14वीं शताब्दी)
- अडभार मंदिर (भग्न शिव मंदिर) — अडभार, तहसील शक्ति, जांजगीर-चांपा (7वीं शताब्दी)
- महादेव मंदिर, पाली — तहसील पाली, कोरबा (8वीं–9वीं शताब्दी)
- पातालेश्वर महादेव मंदिर, मल्हार — तहसील मस्तूरी, बिलासपुर (12वीं शताब्दी)
- शिव मंदिर, गतौरा — तहसील मस्तूरी, बिलासपुर (14वीं–15वीं शताब्दी)
- महादेव मंदिर, बेलपान — तहसील तखतपुर, बिलासपुर (16वीं शताब्दी)
- महादेव मंदिर, बस्तर — तहसील बस्तर, जगदलपुर (12वीं शताब्दी)
- महादेव मंदिर, नारायणपुर — तहसील कसडोल, बलौदाबाजार (13वीं–14वीं शताब्दी)





