Home » देश » RBI Ombudsman Scheme: बैंक की शिकायत का नहीं हुआ समाधान? यहां करें कंप्लेन, मैनेजर को देना होगा जवाब

RBI Ombudsman Scheme: बैंक की शिकायत का नहीं हुआ समाधान? यहां करें कंप्लेन, मैनेजर को देना होगा जवाब

rbi-ombudsman-scheme:-बैंक-की-शिकायत-का-नहीं-हुआ-समाधान?-यहां-करें-कंप्लेन,-मैनेजर-को-देना-होगा-जवाब

नई दिल्ली

अब बैंक आपके द्वार नहीं बल्कि आपकी जेब में हैं। नेट बैंकिंग चाहने वाले कस्टमर हों या सिंपल गूगल पे, फोन पे, भारत पे, पेटीएम का इस्तेमाल करने वाला सामान्य यूजर। UPI ने हर फोन को पेमेंट टर्मिनल बना दिया है, लोन ऐप्स चंद टैप में कर्ज दे रहे हैं। जितनी आसान बैंकिंग हुई, उतने ही फ्रॉड के नए तरीके भी बढ़े हैं। सबसे बड़ी दिक्कत तब होती है, जब बैंक इन फ्रॉड से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते और ग्राहक को परेशान करते हैं।

यहां तक कि लोन की पात्रता होने के बावजूद बैंक मैनेजर आना-कानी करते हैं। इनकी शिकयत के लिए आरबीआई पहले से ही एक लोकपाल (Ombudsman) बैठा रखा है। इसमें अब और सख्ती कर दी गई। RBI का नया लोकपाल रूल्स 2026 अब उपभोक्ताओं को और अधिक अधिकार दे रहा है। यकीन मानिए अगर आपने किसी बैंक मैनेजर की यहा शिकायत कर दी तो वह आपके पास भागा-भागा आएगा।

लोकपाल के पास शिकायतों का अंबार
RBI के लोकपाल के पास वित्त वर्ष 2022-23 में 8.81 लाख शिकायतें आई थीं, जो 2024-25 में बढ़कर 13.4 लाख हो गईं। सिस्टम ने निपटाने की रफ्तार भी बढ़ाई, लेकिन पुराने ढांचे में सुधार की जरूरत थी। इसलिए RBI ने जुलाई 2026 से ‘रिजर्व बैंक इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम’ (RB-IOS 2026) लागू कर दी है।

अब ‘ग्राहक’ की परिभाषा और बड़ी हो गई
पहली बार साफ-साफ बताया गया कि ग्राहक वो है, जो बैंक, NBFC या पेमेंट सिस्टम की कोई सेवा लेता है या उसके लिए अप्लाई करता है। यानी लोन एप्लिकेशन रिजेक्ट होने वाला शख्स भी अब शिकायत कर सकता है। ‘सेवा में कमी’ की परिभाषा अब सिर्फ वित्तीय सेवाओं तक सीमित नहीं; टैक्स सर्टिफिकेट या क्रेडिट रिपोर्ट में गलत जानकारी जैसे मामले भी दायरे में आ गए हैं।

लोकपाल के हाथ और मजबूत हुए
नई स्कीम में लोकपाल किसी और रेगुलेटेड यूनिट को भी शिकायत में पार्टी बना सकता है। मसलन, बैंक के जरिए गलत तरीके से बेची गई बीमा पॉलिसी में अब बैंक और बीमा कंपनी दोनों जवाबदेह होंगे। साथ ही, लोकपाल अब केस का फैसला आने से पहले ही बैंक को बीच-बीच में नॉन-बाइंडिंग सलाह जारी कर सकता है ताकि जल्दी आंशिक या पूर्ण समाधान हो सके।

मुआवजे की लिमिट में जबरदस्त इजाफा
पहले किसी गलती से हुए अप्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान के लिए अधिकतम ₹20 लाख मुआवजा मिलता था, अब यह ₹30 लाख हो गया। मानसिक तनाव, परेशानी और समय की बर्बादी के लिए मिलने वाली रकम ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹3 लाख कर दी गई। एक्सपर्ट मानते हैं कि महंगाई और ट्रांजैक्शन की जटिलता को देखते हुए यह सही कदम है। खासकर सीनियर सिटिजन के लिए पुरानी सीमा बहुत कम थी।

शिकायत का वक्त 90 दिन
सबसे बड़ा बदलाव है कि बैंक से जवाब न मिलने या असंतुष्ट होने पर लोकपाल के पास जाने की मियाद 1 साल से घटाकर सिर्फ 90 दिन कर दी गई। इसका सीधा मतलब, अब आपको बैंक स्टेटमेंट, लोन रिकॉर्ड और क्रेडिट रिपोर्ट बार-बार चेक करनी होगी। सालों बाद गड़बड़ी पकड़ने पर शिकायत का अधिकार खत्म हो सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट का यह भी कहना है कि कम समय में शिकायत पहुंचने पर बैंक के पास सबूत ज्यादा सुरक्षित रहते हैं और फैसला भी तेजी से आता है।

टेक्नोलॉजी से अब सुलह पहले, फैसला बाद में
ऑनलाइन शिकायत करते ही सिस्टम खुद जांच लेगा कि शिकायत दायरे में आती है या नहीं। अमान्य शिकायतें तुरंत खारिज होंगी, सही केस तेजी से आगे बढ़ेंगे। सबसे अहम बदलाव है “पहले सुलह” का तरीका। लोकपाल अब सीधे फैसला सुनाने के बजाय पहले बैंक से बातचीत और मीडिएशन करवाएगा। यह छोटी-मोटी साफ गलतियों में तुरंत राहत का रास्ता खोलता है।

शिकायत करते वक्त इन बातों का रखें ध्यान

    सबसे पहले बैंक/कंपनी को लिखित शिकायत करें, उनका जवाब देने का 30 दिन का समय पूरा होने दें।
    सारे सबूत संभालकर रखें जैसे, ईमेल, कंप्लेंट नंबर, ट्रांजैक्शन रेफरेंस, लोन स्टेटमेंट।
    शिकायत का जवाब संतोषजनक न हो या समय पर न आए, तो 90 दिन के भीतर लोकपाल के पास जाएं।
    हर महीने खाते और साल में कम-से-कम एक बार क्रेडिट रिपोर्ट जरूर जांचें, ताकि गलत एंट्री समय पर पकड़ी जा सके।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

Share this post:

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर